kisan credit card मदद नहीं | किसानों को लुटने का सरकारी षड्यंत्र

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kisan credit card यह लुट नहीं तो क्या है ?

kisan credit card

kisan credit card किसानों को लुटने का सरकारी षड्यंत्र है जिसमे पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें लुटा जाता है | ताजुब्ब की बात तो यह है कि इस लुट को मदद का नाम देकर किसान पर ही अहसान जताया जाता है |

खेती की लागत :-   व्यक्तिगत जीवन लागत को अलग रखकर यदि सिर्फ खेती में लगने वाली लागत को आधार माना जाये तो भी किसान की फसल उसे हर साल घाटा देती है | उदहारण के लिए गेहुं की फसल को ही ले लें और प्रति क्विंटल पर घाटा देंखे |

एक एकड़ गेहुं पर खर्चा  – 6 महीने का ठेका  = 20000

+ बुआई , खाद , दवाई , बीज मिलाकर कुल =  6500

+ फसल में सिंचाई कम से कम 5 बार होगी  =  2500

+ उसके बाद  कटाई , कढाई , ढुलाई होगी =  4300

गेंहू की फसल पर खर्च का कुल जोड़ हुआ = 33300 रुपए

6 महीने की किसान मजदूरी  = 180 गुना 200 = 36000

( 1 दिन की न्यूनतम मजदूरी 200 रुपए )

गेंहू की फसल का कुल खर्चा + मजदूरी = 69300 रुपए 

ऊपज , 18 क्विंटल ,खर्चा प्रति क्विंटल = 3830 रुपए लगभग यदि गेहुं पर खर्चा एवं किसान की मजदूरी ही वापस देती सरकार तो भाव 3800 रुपए से ज्यादा होना चाहिए था लेकिन सरकार देती है भाव 1525 रुपए यानि प्रति क्विंटल 2300 रुपए से भी ज्यादा का घाटा | हर एकड गेहुं की फसल से किसान को लगभग 40000 रुपए का घाटा मिल रहा है , इसी प्रकार बासमती धान व कपास में भी हजारों का घाटा किसान को मिलता है |

kisan credit card का सच 

इस घाटे को दूर करने के लिए भाव बढ़ाने की बजाय सरकार किसान से कहती है की बैंक से लोन ले लो kisan credit card बनवा लो  जिसे वापिस कैसे भरा जायेगा यह सरकार बताती नहीं |

जब 5-7 साल में इस कर्जे से किसान तंग आकर

किसान आत्महत्या करने लगता है तो फिर

इन बुद्धिजीवियों को किसान पर दया आती है

और कहते हैं सरकार से की किसान को लोन में,

ब्याज में छुट दे दो , बोनस दे दो , सब्सिडी दे दो |

थोडा बहुत छुट दिलाकर फिर 5-7 साल के लिए किसान को काम पर लगा देते हैं की जा भाई , मेहनत कर , बाकियों का पेट भर लेकिन खुद भूखा मर या उधार की रोटी खा |

आजादी के बाद से यह खेल चल रहा है

और इसमें हमारे राजनेता भी शामिल हैं

लेकिन अब इनको जवाब देना ही होगा

की सरकार किसान को घाटे पर घाटा देने की इस नीति को बदलना क्यों नहीं चाहती हैं |

आखिर क्यों  सरकार किसानों को बैंकों और साहूकारों का कर्जदार बनाकर रखना चाहती है ? अपने संघर्ष को मजबूत करने के लिए किसान समाज को अब इन कृतध्न बुद्धिजीवियों को मुहतोड़ जवाब देना सीख लेना होगा | जो महंगाई बढ जाने का झूठा डर दिखाकर बाकी समाज को भी किसान के साथ नहीं आने देते |

किसान को ऋण नही उसकी फसल का सही भाव चाहिए

उसके बाद ऋण तो किसान ही दे देगा सरकार को |

जय जवान जय किसान

जय अन्नदाता जय हिन्द

 

 

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