हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक

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दोस्तों आज का हमारा विषय है जाट लेखक तो इस कड़ी में मैं आपको एक ऐसे ही महान लेखक के बारे में जानकारी दूंगा | मुझे उनकी लिखी पुस्तकें बहुत पसंद है और मेरे लिए प्रेरणा दायक ही नहीं बल्कि व्यवहार में लाने वाली चीजे मिली | इसी को ध्यान में रखकर मैंने यह लेख प्रकाशित किया है हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक 

हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक

 हवासिंह सांगवान - एक बेहतरीन जाट लेखक   


1 लेखक का परिचय

2 समाज सेवा

3 आरक्षण के लिए संघर्ष

4 उनका परिवार

5 उनकी लिखी पुस्तकें

6 संपर्क


लेखक का परिचय हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक

नाम : चौ हवा सिंह सांगवान जाट सुपुत्र स्वर्गीय चौधरी श्योनंद सांगवान जाट

जन्मस्थान : गाँव मानकावास तहसील चरखी दादरी , जिला भिवानी (हरयाणा)

जन्मतिथि : 16 मार्च 1947

आपने आठवी तक की शिक्षा अपने गाँव से तथा मेट्रिक की परीक्षा पड़ोसी गाँव चरखी से सन 1965 मैं पास की , कॉलेज की शिक्षा दयानंद कॉलेज हिसार तथा जनता कॉलेज चरखी दादरी से प्राप्त की और सन 1969 में सनातक की डिग्री मिलने पर 6 अक्टूबर1969 को केन्द्रिये रिज़र्व पुलिस बल में हैड कांस्टेबल के पद पर श्रीनगर में नियुक्त हुए |

कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर चलते हुए जन . 2001 में कमान्डेंट के पद पर पहुंचे और प्रथम अप्रैल २००4 को 34 साल सेवा करने के बाद सेवानिवृत हुए | सरकारी रिकॉर्ड में अधिक आयु होने के कारण हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक भविष्ये के प्रमोशन से वंचित रहे |

इस ३४ साल के सेवाकाल में लेह -लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स से कन्या कुमारी तथा नेफा (अरुणाचल ) के हॉट स्प्रिंग्स ( चीन ,ब्रह्मा व भारत सीमा का ट्राई जंक्शन ) से गुजरात के खंभात कस्बे तक लगभग सम्पूर्ण भारत को देखने का अवसर मिला |

हम पढ़ रहे है हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक

केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल की सेवा की बदोलत -पैदल व् खचर के सफ़र से लेकर चेतक हेलीकाप्टर तथा एयरबस तक यात्रा करने का और रेलवे के गले -सड़े प्लेटफोर्म व टूटे -फूटे गाँवो की झोपडियों से लेकर फाइव स्टार होटलों रहने का अवसर प्राप्त हुआ |

इस अवधि में बंगाल का नक्सलवाद ,तेलंगाना आन्दोलन (1973) पी.ए.सी विद्रोह ,बंगाल में बंगलादेशियों की घुसपैठ , पंजाब का उग्रवाद ,गुजरात पुलिस का आन्दोलन .असम में गण-परिषद का आन्दोलन व उल्फा का उग्रवाद ,मिजोरम व मणिपुर के स्थानिये आन्दोलन व उग्रवाद , हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक उसके बाद –

कश्मीरी उगरवाद ,बोडो उग्रवाद ,सन 1990 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद व मंदिर विवाद और मेरठ, मुरादाबाद व हैदराबाद के साम्प्रदयिक दंगे आदि -आदि तथा इसके अतिरिक्त देश भर में अनेक जगह चुनाव के कार्यो में भाग लिया | इस अवधि में अनेक प्रशंसा पत्र तथा मैडल मिले |

लेकिन हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक का मानना है कि आप की सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि पुरे सेवा काल में कभी भी आपने अपने आत्मसम्मान को ठेस तथा अन्याय से समझोता नहीं किया और इसके लिए आपको सन 1976 में पंजाब व हरयाणा उच्च न्यायालय

सन २००० में जम्मू कश्मीर उच्च नयायालय ने भारत सरकार व सी .आर .पी .एफ के खिलाफ जाना पड़ा और पूर्णतया न्याय मिला | इस कारण 34 साल क सेवा काल में 28 साल हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक को भारत के अशांत क्षेत्रो में गुजारने पड़े |

आपकी दूसरी उपलब्धि यह है कि सम्पूर्ण भारत को नजदीक से देखने व विभिन्न समाजों को जानने का अवसर मिला |सन 1988 के बाद जहाँ जहाँ भी रहे वहां के इतिहासों का अध्यन किया तथा अपनी जाट जाती को सामने रखकर हमेशा तुलनात्मक द्रष्टि को अपनाकर गंभीरता से इसका विश्लेषण व चिंतन किया | इसी परिणाम स्वरूप अपनी जाट कौम के बारे में विवश हुए |


समाज सेवा हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक

अगस्त 2006 में जाटो को लुटेरा लिखे जाने का प्रकरण उछलने पर आप की पुस्तिका “असली लुटेरे कौन ?” का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था | उसके बाद पाठको की भारी मांग पर दूसरा ,तीसरा और चौथा संस्करण छपा|

सन 2004 में सेवानिवृति होने के बाद हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक को लगभग सभी संगठनों को नजदीक से देखने का मोका मिला तो पाया कि अधिकतर लोगो में कौम के लिए काम का नहीं बल्कि अपने नाम का जज्बा है और लोग अपना फोटो छपवाने में अधिक विश्वास करते है न कि कौम के लिए काम |

अंत में सन 2007 में हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक ने पाया कि चौ दारा सिंह वाली सभा “अखिल भारतीये जाट महासभा “ही वास्तविक सभा है ,इसके कार्यकर्ता कर्मठ और अपनी कौम के लिए कुछ करने का जज्बा रखते है|


आरक्षण के लिए संघर्ष

इसी कारण हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक ने अखिल भारतीये जाट महासभा के झंडे तले कौम के लिए काम करने का निश्चय किया | आपको सभा ने “हरयाणा प्रदेश आरक्षण संघर्ष समिति ” का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया |

यह उनकी जिंदगी का अकेला पहलू है। चंद लोग ही जानते हैं कि वह एक लेखक भी हैं। सन 1990 में अयोध्या में बाबरी ढांचे को बचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है।

उनका परिवार

कमांडेंट सांगवान भिवानी में मानकावास चरखी दादरी गांव के रहने वाले हैं। पिता श्योनंद सांगवान किसान थे। वो दो साल पहले अपने पैतृक गांव से भिवानी में रहने लगे हैं।

हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक के दो बेटे और एक बेटी हैं। बड़ा बेटा राकेश और छोटा योगेश। दोनों दिल्ली में आप्टीकल फाइबर बिछाने का कारोबार करते हैं। बेटी की शादी हो चुकी है।


उनकी लिखी पुस्तकें  

1. अयोध्या में योद्धा – 1990 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने की पहली कोशिश के दौरान हुई राजनीति पर केंद्रित। तब हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक विवादित भूमि पर तैनात सीआरपीएफ के कमांडेंट थे।

2. चौ. छोटूराम का हत्यारा कौन? – जाट नेता चौधरी छोटू राम की मृत्यु के बाद उनकी विचारधारा पर केंद्रित यह उनकी तीसरी किताब थी।

3. असली लुटेरे कौन? (एक क्रांतिकारी प्रयास), पांचवां संस्करण अक्टूबर 2009) – इस किताब के छह भाग छपे थे।

यह किताब उन्होंने अगस्त 2006 में एक पाठ्य पुस्तक में जाटों को लुटेरा बताए जाने के जवाब में लिखी थी। केन्द्रीय विद्यालयों के पाठ्यक्रम की पुस्तकों में साम्यवादी लेखक विपिन चन्द्र ने ब्रज के जाटों को लुटेरा लिखा था|


संपर्क 

CONTACT : CH HAWA SINGH SANGWAN ; +91-9416056145

अगर आपके पास हवासिंह सांगवान – एक बेहतरीन जाट लेखक जी की

कोई जानकारी है तो हमे कमेन्ट में बताये | दोस्तों

अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे share जरुर करे |

जाट बलवान जय भगवान जय हिन्द 

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