धर्म बदलने से खून नही बदलता

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धर्म बदलने से खून नही बदलता

 

धर्म

धर्म बदलने से खून जाति नश्ल नही बदलते हम हिन्दू से मुस्लिम सिख ईसाई दिन में दस बार बन सकते है पर जाट से ब्राह्मण बनिया कायस्थ जीवन मे एक बार भी नही बन सकते

”माना के मजहब जान हैं इंसान की,
कुछ इसी के दम से कायम शान हैं इंसान की,
रंग-ऐ-कौमियत मगर ये बदल सकता नहीं,
खून आबाई रग-ऐ-तन से निक़ल सकता नहीं”

बिडला सेठ को चौधरी छोटूराम का टका सा जवाब यह पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

भारत हो पाकिस्तान हो ईरान या फिर इराक अफगान, हरियाणा पंजाब राजस्थान यूपी कही भी हो हिन्दू हो मुसलमान सिख, पर जाट जाट से शादी करेगा ब्राह्मण बनिया राजपूत गुज्जर सभी अपनी जातियों में ही शादी करते है उसी धर्म के । ऐसा कोई धर्म नही जहां पूरा समाज दूसरे समाज मे विवाह करता हो बेशक किसी भी धर्म की बात हो ।

यही जातीय पहचान है जो हर धर्म मे स्वीकार्य है पाकिस्तान ईरान इराक जाओगे मुस्लिम जाट मुस्लिम जाटों से रिश्ते जोड़ेगा अफगान पाकिस्तान का मुस्लिम गुज्जर अपने जातीय लोगों से जबकि पंजाब का सिख जट्ट सिख जट्ट में ही शादी करना पसन्द करेगा अरोड़ा खत्री में नही ।

उसी तरह हिन्दू धर्म का जाट भी इसी मापदण्ड पर चलता है

इसलिए हमें यह जानने का अधिकार है

धर्म सिर्फ पूजा पाठ का तरीका है

इसका खून नश्ल व्यवहार व्यवसाय से कोई ताल्लुक नही है ।

हिन्दू पन्थ को छोड़ने वाले सबसे ज्यादा जाट ही है उसके बाद गुज्जर है क्योंकि इस धर्म की वर्ण व्यवस्था इनको जलील करती रही है । विधवा विवाह करने, समगोत्र विवाह न करने और खाप प्रथा को कायम रखने के कारण यह दोनों कौमे हमेशा से हिन्दू धर्म के झंड़ेदारो की आंख में कांटे की तरह चुभते रहे ।

मार्शल कौमों को शुद्र घोषित किया गया।

भला ये वीर कैसे शुद्र बनकर हिन्दू धर्म का हिस्सा बने रहते ?

ईरान इराक से लेकर पाकिस्तान तक जाटों गुज्जरों ने इस्लाम

इसी वजह से स्वीकार किया है जिनकी संख्या आज करोड़ो में है ।

अफगानिस्तान के तो राष्ट्रगान में गुज्जर शब्द आज भी गाया जाता है पाकिस्तान में गुज्जर मुस्लिमों की भरमार है । लश्कर प्रमुख हाफिज सईद भी एक गुज्जर ही है जबकि पंजाब में एक करोड़ से ज्यादा सिख बने जाट भी कभी इसी धर्म से गये है।

संयुक्त पंजाब में इनकी यूनियनिस्ट सरकार बनती थी । सर सिकन्दर हयात , सरदार सुंदर सिंह गिल और सर छोटूराम सब जाट ही तो थे । जिन्होंने इन मक्कारों के पाखण्डों को मिट्टी में मिलाया था ।

यह विश्व के एकमात्र मजहब है

जिसमे से लोग सिर्फ गए है कोई इसमे आया नही है ।

आज जो ये नीच चिल्लाते है घर वापसी कराओ

उनसे पूछो घर वापसी तो हो जाएगी पर उन्हें रखोगे कहाँ ?

आपकी वर्ण व्यवस्था में उनका दर्ज़ा क्या होगा ?

क्या उनका दर्ज़ा शुद्र होगा या उससे भी बदतर ? जब उनकी शादी ही नही होगी तो उनकी वापसी के मायने क्या है ? कौन सा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य हिन्दू उन घर वापसी किये लोगों से अपनी लड़की ब्याहेगा ?

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