Teja ji Ke Deewane | तेजाजी के दीवाने

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Teja ji Ke Deewane

Teja ji Ke Deewane
वीर तेजाजी का जीवन परिचय – इतिहास – Teja ji Ke Deewane

तेजाजी राजस्थान गुजरात मध्य प्रदेश में किसानों के लोक देवता है | उनके सत्यवादी जीवन की बहुत गहरी मिशाल है | वचन निभाने के लिए अपने जीवन को कुर्बान करने वाले तेजा जी नागौर जिले के खरनाल धाम 

Teja ji Ke Deewane

तेजाजी तेरे नाम प, मेरा ध्यान हो लिया
मैं तो तेरे नाम पे प्यारे, बदनाम हो लिया |

दर्शन की शोभा न्यारी, खरनाल में मेला भारी
लीले की करे असवारी , मन मेरा मोह लिया
मैं तो तेरे नाम पे प्यारे, बदनाम हो लिया |
लीलन आले रे नाम पे …

मैंने लिया फकीरी बाना, मुझे दुनिया मारे ताना
तेजाजी का दीवाना , अब सरेआम हो लिया
मैं तो तेरे नाम पे प्यारे, बदनाम हो लिया |
तेजा जी तेरे नाम पे …

तेरी जब जब देखू मूर्त, मेरे मन में बस गयी सुरत
दर्शन की हुई जरूरत , तू सारे क टोह लिया |
मैं तो तेरे नाम पे प्यारे, बदनाम हो लिया |
सत्यवादी तेरे नाम पे …

देशवाल भक्त स तेरा, म्हारा रोहतक के म डेरा
करो दिल का दूर अँधेरा , गलतान हो लिया |
मैं तो तेरे नाम पे प्यारे, बदनाम हो लिया |
तेजाजी तेरे नाम पे .. मेरा ध्यान हो लिया |

तेजाजी तेरे दर पर एक लाचार आवे स – Teja ji Ke Deewane

 

तेजा तेरे दर प एक लाचार आवे स
एक तेरी सुरत प एतबार आवे स

मने बहुत घना समझाया , दिल डटा न डाटा जाया
तेरे दर्शन करना चावे , तू कद लीलन प आवे स

तेरा सुनी थी जब यो कहानी, मेरे नैना बरसा पानी
तेजा जी तेरी बाणी , हम सुनना चावे स

तेरा जब जब मेला लागे, अंधकार दूर फेर भागे
भगता की किस्मत जागे, सब नुए बतावे स

रोहतक से तेरा सिमरण , देशवाल करे स अर्पण
कर न पाया थारा दर्शन, मने क्यों सतावे स

तेजा तेरे दर प एक लाचार आवे स
एक तेरी सुरत प एतबार आवे स

बोलो वीर शिरोमणि तेजा जी धोलिया महाराज की जय

Teja ji Ke Deewane

लोक देवता तेजाजी का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गाँव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था।

उनके पिता गाँव के मुखिया थे। यह कथा है कि तेजाजी का विवाह बचपन में ही पनेर गाँव में रायमल्जी की पुत्री पेमल के साथ हो गया था |

किन्तु शादी के कुछ ही समय बाद उनके पिता और पेमल के मामा में कहासुनी हो गयी और तलवार चल गई जिसमें पेमल के मामा की मौत हो गई।

इस कारण उनके विवाह की बात को उन्हें बताया नहीं गया था। एक बार तेजाजी को उनकी भाभी ने तानों के रूप में यह बात उनसे कह दी तब तानो से त्रस्त होकर अपनी पत्नी पेमल को लेने के लिए घोड़ी ‘लीलण’ पर सवार होकर अपनी ससुराल पनेर गए।

रास्ते में तेजाजी को एक साँप आग में जलता हुआ मिला तो उन्होंने उस साँप को बचा लिया किन्तु वह साँप जोड़े के बिछुड़ जाने कारण अत्यधिक क्रोधित हुआ

और उन्हें डसने लगा तब उन्होंने साँप को लौटते समय डस लेने का वचन दिया और ससुराल की ओर आगे बढ़े।

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वहाँ किसी अज्ञानता के कारण ससुराल पक्ष से उनकी अवज्ञा हो गई। नाराज तेजाजी वहाँ से वापस लौटने लगे तब पेमल से उनकी प्रथम भेंट उसकी सहेली लाछा गूजरी के यहाँ हुई।

उसी रात लाछा गूजरी की गाएं मेर के मीणा चुरा ले गए। लाछा की प्रार्थना पर वचनबद्ध हो कर तेजाजी ने मीणा लुटेरों से संघर्ष कर गाएं छुड़ाई।

इस गौरक्षा युद्ध में तेजाजी अत्यधिक घायल हो गए। वापस आने पर वचन की पालना में साँप के बिल पर आए तथा पूरे शरीर पर घाव होने के कारण जीभ पर साँप से कटवाया।

किशनगढ़ के पास सुरसरा में सर्पदंश से उनकी मृत्यु भाद्रपद शुक्ल 10 संवत 1160, तदनुसार 28 अगस्त 1103 हो गई तथा पेमल ने भी उनके साथ जान दे दी।

उस साँप ने उनकी वचनबद्धता से प्रसन्न हो कर उन्हें वरदान दिया। इसी वरदान के कारण तेजाजी भी साँपों के देवता के रूप में पूज्य हुए।

गाँव गाँव में तेजाजी के देवरे या थान में उनकी तलवारधारी अश्वारोही मूर्ति के साथ नाग देवता की मूर्ति भी होती है।

इन देवरो में साँप के काटने पर जहर चूस कर निकाला जाता है तथा तेजाजी की तांत बाँधी जाती है। तेजाजी के निर्वाण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी को प्रतिवर्ष तेजादशमी के रूप में मनाया जाता है।

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तेजाजी का जन्म धौलिया गौत्र के जाट परिवार में हुआ। धैालिया शासकों की वंशावली इस प्रकार है:-

  1. .महारावल
  2. भौमसेन
  3. पीलपंजर
  4. सारंगदेव
  5. शक्तिपाल
  6. रायपाल
  7. धवलपाल
  8. नयनपाल
  9. घर्षणपाल
  10. तक्कपाल
  11. मूलसेन
  12. रतनसेन
  13. शुण्डल
  14. कुण्डल
  15. पिप्पल
  16. उदयराज
  17. नरपाल
  18. कामराज
  19. बोहितराव
  20. ताहड़देव
  21. तेजाजी

वीर तेजाजी के बुजुर्ग उदयराज ने खड़नाल पर कब्जा कर अपनी राजधानी बनाया। खड़नाल परगने में 24 गांव थे।

तेजाजी का जन्म खड़नाल के धौल्या गौत्र के जाट कुलपति ताहड़देव के घर में चौदस वार गुरु, शुक्ल माघ सत्रह सौ तीस को हुआ।

तेजाजी के जन्म के बारे में मत है-
  • जाट वीर धौलिया वंश गांव खरनाल के मांय।
  • आज दिन सुभस भंसे बस्ती फूलां छाय।।
  • शुभ दिन चौदस वार गुरु, शुक्ल माघ पहचान।
  • सहस्र एक सौ तीस में प्रकटे अवतारी ज्ञान।।

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