किसान के नाम पर दुकानदारी | राजनैतिक पार्टियों की दुकानें

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किसान के नाम पर दुकानदारी

यूं तो कहने को किसानो के कई संगठन हैं लेकिन उनमे से अधिकांश अलग – अलग राजनैतिक पार्टियों की दुकानें हैं |

जिनके माध्यम से वो किसानो को बहकाकर किसान के नाम पर दुकानदारी (अपनी राजनीती) चलाती हैं |

किसान के नाम पर दुकानदारी

अपने आपको किसानो का सच्चा सिपाही बताने वाले अधिकांश किसान नेता किसी न किसी राजनैतिक पार्टी के प्रचारक हैं|

जो 4 साल 9 महीने किसानो के नाम पर अपनी छवि चमकाकर चुनाव के समय अपनी पार्टी को समर्थन देकर पूरी किसान कोम को इस लुटेरे व फरेबी नेताओ के चरणों में नमस्तक कर देते है |

  • चुनाव में अपनी पार्टी झंडा उठाकर वो पुरे किसान समाज का सौदा कर लेते हैं |
  • जब चुनाव खत्म हो जाता हैं तो वो फिर से पार्टी का चोला उतारकर
  • किसान नेता के कपडे पहन लेते हैं,
  • फिर मुआवजा, फ्री बिजली, सब्सिडी, बोनस के लिए
  • झूठे-मूठे आन्दोलन चलाकर किसानों को जोड़ लेते हैं कि
  • भाई इस बार समझोता नहीं करेंगे, आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे |
  • हालत से मजबूर किसान और कोई चारा देखकर फिर उनके साथ आ जाता हैं
  • और फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाती हैं,
  • वही समझौता, वही दलाली |

इन पाखंडी किसान नेताओं ने किसानों को अपनी रोजी-रोटी चलने का धंधा बना लिया हैं और किसानो के नाम पर बेखटके अपनी खानदानी दुकानें जमा ली हैं |

इन पाखंडी नेताओं को घर बिठाए बिना किसानों का कोई भी आन्दोलन सफल होना बहुत मुश्किल हैं क्योंकि यह बहुत ही शातिर और जुबान से तेज नेता, किसानों को बहकाकर उनकी एकता होने नहीं देते |

अगर और कुछ नही कर पाते तो यह किसान आंदोलन के बारे झूठे आरोप लगाकर उसके खिलाफ लोगो को भड़काने में लग जाते हैं | ऐसे दलालों से बचनें व उनकी पहचान करने के लिए आप एक तरीका आजमाएं |

हम पढ़ रहे है किसान के नाम पर दुकानदारी

किसान के नाम पर दुकानदारी

जब भी कोई किसान संगठन का नेता आपके बीच में प्रचार-बाजी करने आता हैं तो उससे यह 3 सवाल पूछे ?

  1. क्या वो किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ा हैं ?
  2. क्या उसने पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी की टिकट मांगी थी ?
  3. क्या उसने पिछले चुनाव में किसी पार्टी का समर्थन या विरोध किया था ?
  4. क्या किसी पार्टी या नेता के लिए वोट मांगे थे ?

यदि वो इन सवालों का जवाब ‘ना’ कहे तो उसके गांव में या आसपास के गांव में पता करवाएं की वो सच्चा हैं या झूठा | यह असली और नकली नेताओं के बीच फर्क करने का, उनकी पहचान करके नकली को घर बिठाकर असली नेता के हाथ मजबूत करने का सबसे आसान रास्ता हैं, इसीलिए बहकावे में न आकर हर नेता हर पार्टी को इसी कसौटी पर कसे | तभी किसान की आजादी की यह लड़ाई सफल हो पायेगी |

  • दोस्तों आपको ये लेख किसान के नाम पर दुकानदारी कैसा लगा
  • अगर आपके पास किसान से सम्बन्धित कोई समस्या है तो उसे
  • हमे कमेन्ट या मेल में बताये, उसे हम हाई लाइट करेगे |
  • जय हिन्द जय किसान

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