किसान की दुर्गति के जिम्मेदार जातिगत कौमी स्वयम्भू नेता

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सबको राजा बनाया , फिर क्यूं धोखा खाया

किसान की दुर्गति के जिम्मेदार
किसान की दुर्गति के जिम्मेदार आजादी के बाद 71 साल में किसान के नाम पर राजनीती करने वाली हर पार्टी व नेता को सत्ता में आने का मोका मिला है लेकिन आज तक किसी भी नेता व पार्टी ने ताकत हाथ में आने के बाद किसान को उसकी फसल के भाव महंगाई व खर्चो के आधार पर दिए जाने का कानून नहीं बनाया |

विपक्ष में रहते हुए जो किसान के नाम पर बड़ी – बड़ी कसमें खाते थे,

वो सरकार में आते ही पूंजीपतियों के हाथ कठपुतली बन गए |

सरकार में रहते हुए उन्होंने न कभी किसानो के दर्द को समझा

और ना ही उस दर्द का इलाज करने के लिए कोई ठोस काम किया |

विपक्ष में रहते हुए किसानो के नाम पर आसू बहाने वाला सरकार में आते ही किसान पर लाठिया, गोलिया चलवाकर उसे क्यों दबा देना चाहते है? किसान का बेटा होने की दुहाई देने वाले सत्ता मिलते ही किसान को मंडियों में साहुकारो के हाथो लुटने को क्यों छोड़ देते हैं ?

इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमें राजाओ

रजवाडो के समय की बाते याद करनी होगी |

जब कोई राजा या नवाब सड़क से गुजरता था

तो मजबूर जनता गर्दने नीची करके सलामी दिया करती थी |

राजाओ के हुकुम के आगे किसी को आवाज उठाने का ह़क नहीं था |

एक आम किसान – मजदुर की जिंदगी राजा की दया की मोहताज होती थी | आज कहने को तो देश में लोकतंत्र है लेकिन दोगले  कौमी नेताओ की सोच वही राजाओ वाली है आज भी वो सोचते है की जनता उनकी सलामी ठोके उन्हें राजाओ – नवाबो की तरह अपनी जिंदगी का भगवान समझे |

हम पढ़ रहे है किसान की दुर्गति के जिम्मेदार कौन ?

इसी सोच के कारण वो देश के किसान व मजदुर को आर्थिक रूप से कमजोर रखकर अपनी दया का मोहताज बनाये रखना चाहते हैं | उन्हें दर लगता है की कही किसान आर्थिक रूप से मजबूत होकर उनकी गुलामी करना न छोड़ दे | इसी लिए ये कौमी नेता किसान की दुर्गति के जिम्मेदार बने रहते है |

उनका डर सही भी है क्योंकि अगर

 किसान को उसकी फसल का भाव ठीक मिलने लगा

और खेती से उसका गुजारा ठीक चलने लगा तो

किसान क्यों अपने बेटे – बेटी की नोकरी के लिए

उनके आगे – पीछे चक्कर लगाएगा ?

क्यों लाइन लगाकर गाव के बाहर सलामी देगा

जब नेताजी दोरें पर गाव के बाहर आएँगे ?

क्यों उनका खास बनने के लिए

अपने भाइयों तक से भाईचारा बिगाड़ लेगा ?

अगर किसान समाज को अपनी मेहनत की लूट से पीछा छुड़ाना है तो सबसे पहले इस राजनैतिक पार्टियों की अंधी – भक्ति को छोड़ना होगा, माई-बाप इन राजनेताओ को मानने की बजाय खुद अपने आप को मजबूत करना होगा |

अपने भविष्य के अँधेरे को दूर करने के लिए इन राजनैतिक पार्टियों पर निर्भर रहने की बजाय खुद ही एकजुट होकर संघर्ष करना होगा खुद अपने आप पर, अपनी एकता की ताक़त पर भरोसा करना होगा |

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अगर आपको किसान की दुर्गति के जिम्मेदार कौन ?

लेख में कुछ थोड़ी बहुत भी सच्चाई नजर आई हो

तो हमे कमेन्ट में जरुर बताये | जय किसान जय हिन्द 

 

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